लखनऊ: राजधानी लखनऊ में स्थित होटल, गेस्ट हाउस, मॉल, अस्पताल और अन्य बहुमंजिला इमारतों में अब अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की गहन जांच की जाएगी। हाल ही में दिल्ली के एक होटल में लगी भीषण आग और उसमें हुई दर्दनाक जनहानि के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भी सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने शुक्रवार को प्रवर्तन विभाग और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें शहर की ऊंची इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों की स्थिति की समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य अग्निशमन अधिकारी अंकुश मित्तल, अपर सचिव ज्ञानेन्द्र वर्मा, सीपी त्रिपाठी सहित सभी जोनल अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने शहर में मौजूद बहुमंजिला इमारतों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर विस्तार से चर्चा की और आने वाले दिनों में विशेष जांच अभियान चलाने पर सहमति जताई। माना जा रहा है कि इस अभियान के तहत उन सभी इमारतों की जांच की जाएगी जहां बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन आते-जाते हैं। इनमें होटल, शॉपिंग मॉल, निजी अस्पताल, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, गेस्ट हाउस और अन्य सार्वजनिक उपयोग की इमारतें शामिल होंगी।
एलडीए अधिकारियों का मानना है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सिर्फ भवन का निर्माण पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसमें मौजूद सुरक्षा व्यवस्थाओं का समय-समय पर परीक्षण और रखरखाव भी उतना ही जरूरी होता है। कई बार भवनों में अग्निशमन यंत्र तो लगे होते हैं, लेकिन लंबे समय तक उनकी सर्विसिंग नहीं होने के कारण जरूरत पड़ने पर वे सही तरीके से काम नहीं कर पाते। ऐसे में अब जांच के दौरान फायर एक्सटिंग्विशर, स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म, इमरजेंसी एग्जिट और अन्य सुरक्षा उपकरणों की स्थिति को भी परखा जाएगा।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कई इमारतों में निर्माण के समय तो अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है, लेकिन बाद में विभिन्न बदलावों के चलते सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। कई स्थानों पर इमरजेंसी निकास मार्गों पर सामान रख दिया जाता है या फिर पार्किंग और अन्य सुविधाओं के विस्तार के कारण सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं कमजोर हो जाती हैं। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए निरीक्षण टीमों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान यदि किसी भवन में गंभीर लापरवाही पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बहुमंजिला इमारतों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि के बीच अग्नि सुरक्षा पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। एक छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यही वजह है कि देश के विभिन्न शहरों में समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट कराए जाते हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके। लखनऊ में शुरू होने वाला यह अभियान भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शहर के नागरिकों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। कई लोगों का कहना है कि होटल, मॉल और अस्पताल जैसी जगहों पर रोजाना हजारों लोग आते हैं, इसलिए वहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होना बेहद जरूरी है। खासकर अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है, क्योंकि आपात स्थिति में वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी प्रकार मॉल और होटल में भी भीड़ अधिक होने के कारण किसी भी दुर्घटना की स्थिति में जोखिम बढ़ जाता है।
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एलडीए और अग्निशमन विभाग के संयुक्त अभियान से उम्मीद की जा रही है कि शहर में सुरक्षा मानकों को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और भवन संचालक भी अपनी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जहां आवश्यकता होगी वहां सुधार के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इससे भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की संभावना को कम किया जा सकेगा।
फिलहाल शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित बहुमंजिला इमारतों की सूची तैयार की जा रही है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से निरीक्षण अभियान शुरू किया जाएगा। एलडीए का उद्देश्य सिर्फ नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि शहर के लोगों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच के दौरान कितनी इमारतें सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती हैं और किन स्थानों पर सुधार की जरूरत सामने आती है।
दिल्ली में हुए हालिया हादसे ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि सुरक्षा व्यवस्थाओं को कभी भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। ऐसे में लखनऊ में शुरू होने वाला यह अभियान न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी एक सकारात्मक और आवश्यक पहल माना जा रहा है।